नमस्कर दोस्तों मेरा नाम है ओंकार और मेरी वेबसाइट OKTECHGALXY.COM पर आपका फिर से एक बार स्वागत है । दोस्तों कुछ दिन पहले आपने यह सुना होगा कि एलन मस्क दुनिया के सबसे ज्यादा कमाई करने वाले या फिर पैसे कमाने वाले व्यक्ति बन गए हैं ।

अगर आप यह सोच रहे होंगे कि Space X Kya hai या फिर एलन मस्क जी के इनकम सोर्स क्या है ? तो मैं आपको बता दूं टेस्ला और Space X यह मेन सोर्स एलन मस्क के पास इनकम सोर्स के लिए है । साथ में अलग-अलग कंपनी में उनके शेयर्स भी है । पर हमें आज पहले एलन मस्क के इनकम सोर्स के बारे में पता नहीं करना है ।

हमें पता करना है Space X के बारे में क्योंकि हमारा जो कैटेगरी है वह ज्यादातर गैलेक्सी पर आर्टिकल लाता रहता है और Space X उसी केटेगरी का एक हिस्सा हो चुका है । उसके भविष्य में क्या कुछ निर्णय हो सकते हैं?

एलन मस्क के सबसे 2 बड़े प्रोजेक्ट जिसमें टेस्ला कंपनी भी आती है और Space X भी आता है . तो उन दोनों पॉइंट पर हम बात करेंगे पर टेस्ला कंपनी की कार्स इंडिया में चलेगी या नहीं इस पर हम अलग आर्टिकल पब्लिश करेंगे और विस्तार से जानकारी लेंगे ।

साथ में आज के इस पोस्ट में हम Space X के बारे में पूरी जानकारी लेंगे । इसके पहले हमने स्पेस पर काफी सारी इनफार्मेशन ली है । आप नीचे दी गई कैटेगरी पर क्लिक करके डायरेक्टली उन सभी पोस्ट को पढ़ सकते हो ।

तो दोस्तों चलिए आज के इस पोस्ट में आपको क्या कुछ नया इंटरेस्टिंग और यूज़फुल जानने को मिलेगा इसके बारे में मैं सबसे पहले सभी पॉइंट आपको बता देता हूं और उस पॉइंट पर हम काफी विस्तार से नीचे जानकारी लेंगे ।

इस पोस्ट में आप नया, इंटरेस्टिंग और यूजफुल जानोगे की स्पेस एक्स क्या है? स्पेस एक्स कैसे काम करती है? स्पेस एक्स कंपनी फ्यूचर स्पेस रिसर्च के लिए क्या करेगी? पुराने स्पेस मिशन में क्या कमियां? What is space x in hindi? How does work space x?

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स्पेस एक्स क्या है? स्पेस एक्स कैसे काम करती है? How does work space x?
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पुराने स्पेस मिशन में क्या कमियां होती थी?

 Sattelite से संपर्क टूटना या ईंधन खत्म होना ::

 दोस्तों कई सालों से यानी कि कि लगभग 50 से 70 साल पहले से स्पेस मिशन को अंजाम दिया जा रहा है . या फिर स्पेस में अलग-अलग मिशन भेजे जा रहे हैं जिनमें से कुछ आज भी काम कर रहे हैं और कुछ मिशन का काम पूरा होने के बाद उनसे संपर्क टूट चुका है ।

यह इस कारण होता है कि स्पेस रिसर्च में भेजे गए रोवर और सैटेलाइट का पर्याप्त ईंधन खत्म हो जाता है या फिर उसे ऊर्जा मिलना बंद होता है । तब वह आखिरी बार अपना काम करता है यानी कि गैलेक्सी की फोटो पृथ्वी पर भेजता है या फिर सेल्फी भी भेजता है ।

हालांकि स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन कंपनी को यह पहले से पता चलता है कि भेजा गया सेटेलाइट कितनी देर तक काम करेगा और उसके हिसाब से वह उसे सेल्फी के लिए कमांड देते हैं या फिर फोटो क्लिक करके सेंड करने के लिए कमांड देते हैं ।

पर अपना काम खत्म होने के बाद या ऊर्जा मिलना बंद होने के बाद वह किसी काम का नहीं रहता है । और वह अंतरिक्ष में कहीं दूर निकल जाता है । यह भी स्पेस रिसर्च में एक बहुत बड़ी कमी रह गई है।

रॉकेट दोबारा इस्तेमाल करने में दिक्कत::

दोस्तों किसी भी स्पेस रिसर्च कंपनी को, कोई रॉकेट या सैटेलाइट अंतरिक्ष में भेजने के लिए 200 मिलियन डॉलर खर्च आता है । पर यह खर्चा हर एक कंपनी का अलग-अलग होता है । क्योंकि हर एक कंपनी अपने हिसाब से स्पेस रिसर्च के लिए पैसा लगाती है या फिर इतना खर्चा करती है ।

हालांकि पुरानी स्पेस प्रोग्राम के लिए ज्यादा खर्चा आता था । पर अभी के स्पेस प्रोग्राम के लिए कम खर्चे आने लगे हैं क्योंकि पुराने टेक्नोलॉजी से कई सारे मिशन फेल होते थे क्योंकि वह या तो पृथ्वी की सुरफेस से ऊपर उठकर 100 से 200 मीटर में ही ब्लास्ट होते थे या फिर लॉन्च होते ही जमीन पर ब्लास्ट होते थे ।

तब टेक्नोलॉजी इतनी कारगर नहीं थी । पर अब टेक्नोलॉजी काफी बढ़ गई है और काफी कम सैटेलाइट हैं जो कि रॉकेट ब्लास्ट हो जाए या फिर मिशन फेल हो जाए ।

बूस्टर का दोबारा इस्तेमाल करने में कमी

नई टेक्नोलॉजी से 90% स्पेस मिशन सफल रहते है । 10% मिशन इसलिए फैल हो जाते है क्योंकि कुछ देश के पास अभी भी पर्याप्त टेक्नोलॉजी नहीं है । भारत का मंगलयान 2 आपने पढ़ा होगा तो आपको समझ में आ जाएगा कि वह मिशन 95% सफल रहा क्योंकि वह कम से कम चांद तक तो पहुंचा ही था और चांद पर पहुंचे हुए रोवर ने सिग्नल भेजना शुरू किया होता तो वह सौ पर्सेंट सफल रहता |

पर दोस्तों बात यहां पर भी खत्म नहीं होती है । हर एक स्पेस प्रोग्राम के लिए अलग-अलग रॉकेट इस्तेमाल करना काफी खर्चा करवाता है क्योंकि एक बार स्पेस में बूस्टर चला जाए तो उसके अलग-अलग भाग स्पेस में अलग होने लगते हैं और सबसे आगे जो सेटेलाइट के हिस्से होते हैं या फिर अलग-अलग सेटेलाइट होते हैं वह स्पेस में अपनी कक्षा में स्थित होते हैं ।

पर उन सैटेलाइट को अंतरिक्ष तक भेजने के लिए उन्हें पृथ्वी से ऊपर उठाना पड़ता है इसके लिए दो से तीन रॉकेट को इस्तेमाल किया हो जाता है और वह रॉकेट ही उन सारी चीजों को पृथ्वी के बाहर ले जाने के लिए बूस्ट करते हैं और उसके बाद एक बार उन रॉकेट का काम खत्म हो गया तो वह उस स्पेस शटल से अलग हो जाते हैं

अंतरिक्ष में कहीं खो जाते हैं और यही रोकने काम आने वाले समय में Space X करने जा रही है ।  एक बार वह रॉकेट या बूस्टर पृथ्वी पर अपनी जगह वापस आने लगे । तो इससे कई करोड़ों का फायदा उस एजेंसी को होगा ।

Space X के मालिक एलन मस्क का यह कहना है कि ऐसा करने से कंपनी कम से कम 5% रकम इससे बचा सकती है । अब अगर 5% आपको कम लग रहा हो तो इसे करोड़ों रुपए की गिनती से कम्पेयर करके देखे ।

Space X क्या है?

Space X दुनिया की एक ऐसी अकेली कंपनी है जो अपने खुद के दम पर स्पेस मिशन को अंजाम देने की कोशिश करती है । यानी कि Space एक्स एक Private Space कंपनी है । बाकी स्पेस एजेंसी की बात करें तो उसका बजट और फायदा उन देशों को होता है जो जिसके देश की हो जैसे कि इसरो का पूरा बजट भारत सरकार निर्धारित करती है और उस बजट पर ही Isro को काम करना पड़ता है ।

नासा का भी कुछ इसी तरह का काम होता है यानी नासा को अमेरिकन गवर्नमेंट द्वारा कार्यरत किया गया है । पर गवर्नमेंट स्पेस एजेंसी को पैसा देने के बाद स्पेस रिसर्च से जो भी फायदा होगा उसकी डिटेल अन्य देशों के साथ बेचना चाहे तो बेच सकती है और उस डिटेल के बदले पैसा कमा सकती है ।

साथ में किसी एक देश का सेटलाइट हो और उसका इस्तेमाल किसी अन्य देश को करना ही तो पैसे देकर किया जा सकता है । पर इसके लिए दोनों देशों के अप्रूवल की जरूरत होती है । सैटेलाइट इस्तेमाल करने का अप्रूवल ना लिया जाए तो या तो वह हैकिंग कहलाएगा या फिर जासूसी ।  

Space X काफी आगे सोचने वाली कंपनी है जो कि काफी रिसर्च करके ही अपना मिशन करवाती है । ऐसे में स्पेस शटल मैं लगे रॉकेट को पृथ्वी पर वापस लाना यही Space X का महत्वपूर्ण काम है । यह टेक्नोलॉजी अभी तक किसी भी स्पेस एजेंसीज के पास नहीं है ।

बाकी स्पेस एजेंसी सैटेलाइट को अंतरिक्ष में भेजने तक सीमित काम कर सकती है । पर Space X का ऐसा दावा है कि वह अपना रॉकेट वापस भी ला सकते हैं । और Space X ने कारनामा करके भी दिखाया है ।

दोस्तों एलन मस्क के आइडिया और टारगेट्स भी काफी बड़े होते हैं । पर वह कभी हार नहीं मानते ऐसे में Space X द्वारा भेजे गए तीन मिशन तो ऐसे ही फेल हो गए थे । पर उन्होंने कभी हार नहीं मानी । उन्होंने चौथे प्रयास में अपना काम करके ही दिखाया । अब उनके पास टेस्ला और Space X जैसी बड़ी कंपनियां है ।

तो अवश्य कंपनी में इन्वेस्ट भी काफी सारे लोग करना चाहते हैं क्योंकि एक मिशन फेल होने के बाद दूसरी कंपनी द्वारा वह मुनाफा पा सकते हैं या फिर अन्य मिशन को अंजाम दे सकते हैं । एलन मस्क का ऐसा कहना है कि रॉकेट का रीयुज किया जाना चाहिए और इसलिए क्योंकि रॉकेट की कीमत उसे मिशन में भेजने से कमी गुना ज्यादा होती है.

ऐसे रॉकेट दोबारा सा इस्तेमाल करने के लिए उन्हें पृथ्वी तक वापस लाना जरूरी है और यही सबसे मुश्किल काम होता है । क्योंकि जो रॉकेट मिशन में भेजा है उसे वापस लाना और पृथ्वी पर दोबारा लैंड करना जब कोई आम बात नहीं होती ।

जब भी कोई रॉकेट या बूस्टर अंतरिक्ष में खो जाता है तो या तो वह बंद होकर अपना काम बंद कर देता है या उससे संपर्क टूट जाता है । और अगर संपर्क बन भी गया तो पुराने रॉकेट में यह सुविधा ही नहीं होती है की उन्हे पृथ्वी पर लैंड किया जाए । तो उसे समंदर में गिराया जाता है । और इसीका समाधान है Space X ।

Space X किस तरह से काम करता है?

 6 February 2018 को अमेरिका में दुनिया का सबसे शक्तिशाली रॉकेट लॉन्च किया गया है । टेस्ला के अरबपति मालिक एलन मस्क की कंपनी SpaceX ने फाल्कन हेवी रॉकेट को फ्लोरिडा के केनेडी स्पेस सेंटर से लॉन्च किया था ।

अभी तक जो भी दूसरे रॉकेट अपने साथ जितना भार स्पेस ने ले जा सकते हैं, फॉल्कन हेवी उसके मुकाबले दोगुना भार को ले जाने की क्षमता रखता है । तो अब आप समझ गए होंगे कि Space X किस तरह की टेक्नोलॉजी इस्तेमाल करता होगा या फिर कितने आगे की सोचता होगा ।

फाल्कन हेवी रॉकेट का वजन लगभग 63.8 टन है, जो तकरीबन दो स्पेस शटल के वजन के बराबर है. 27 मर्लिन इंजन वाले इस रॉकेट की लंबाई 230 फुट है । इससे होगा यह कि कम बजट में भी दुगना काम किया जाएगा ।

यह रॉकेट अपने साथ ओसियन मॉनिटरिंग सैटेलाइट जेसन–3 लेकर गया है। यह उपग्रह महासागर पर जलवायु परिवर्तन या मानव–प्रेरित परिवर्तन के अध्ययन में मदद करने के लिए महासागर के तल के स्थालकृति की जांच करेगा। और वह जानकारी इस्तेमाल करके नई जानकारी पर रिसर्च की जाएगी ।

Space X द्वारा विकसित की गई एक रियुज रॉकेट प्रक्षेपण प्रणाली है। 21 दिसंबर 2015 को Space X ने फाल्कन 9 प्रक्षेपण यान के पहले चरण के बूस्टर को प्रक्षेपण के बाद फिर से जमीन पर उतारा । तो इसमें अब आप देख सकते हो कि प्रक्षेपण के बाद ही बूस्टर को या रॉकेट को जमीन पर वापस लौट आने की पूरी क्षमता से Space X के पास मौजूद है ।

और दूसरी कंपनियां अभी भी इस पर रिसर्च कर रही है । शायद यह टेक्नोलॉजी के आसपास भी दूसरी कंपनियां नहीं है क्योंकि दूसरे देशों का या फिर रिसर्च कंपनी का यह मानना होता है कि वह उनका डाटा दूसरे देशों को बेचकर या दूसरे देशों को अपने सैटेलाइट का इस्तेमाल करने को देकर वह पैसा कमा रही है ।

पर एलन मस्क इससे आगे सोचकर रॉकेट को ही दोबारा इस्तेमाल करने की सोच रहे हैं । एलन मस्क को पूरी मानव जाति को हो विकसित करना है । वह क्यों इसके बारे में आगे बात करेंगे ।

Space X स्पेस रिसर्च के लिए क्या करेगा?

 अगर बात करें Space X की तो यह कंपनी यात्रियों को भी स्पेस में ले जाने का प्रयास करने वाली है । जिसका कुल खर्चा एक रात के लिए 25,00,000 रुपए के करीब होगा । तो अब आप या आम जनता जैसे लोग एक रात के लिए तो स्पेस में नहीं जाएंगे । ना ही ऐसी कोई कैटेगरी होगी ।

जब भी स्पेस मिशन यात्रा कि जाएगी और उसमें मनुष्यो को अंतरिक्ष में यात्रा करने के लिए भेजा जाएगा तो कम से कम एक से 2 हफ्ते तो स्पेस में रहना होगा और ऐसे कई सारे लोगों को Space X एक साथ अंतरिक्ष की सैर करवाई ।

तो आप सोच सकते हो कि Space X एक यात्रा से कितना कमाए कमाएगी और उनका बजट कितना होगा । एलन मस्क का पहले से यह मानना है कि स्पेस यात्रा को पहले से बेहतर और सस्ता बनाना और लोगों को अलग-अलग ग्रहों पर स्थित करना । जिसका कई कंपनियां पहले से इंतजार कर रही है । पर बाकी कंपनियां खुद के बारे में सबसे पहले सोचती है और उनके बजट भी बाकी कंपनियों से अलग होते हैं या ज्यादा होते हैं ।

एलन मस्क जिनका अब तक का जीवन प्रवास देखे तो दूसरों से काफी अलग रहा है । जिनका कहना यह है कि इंसानी बस्ती मार्स पर बसाई जानी जरूरी है और उसके लिए वह जी जान से और प्रयास करते आ रहे हैं । उन्होंने अब तक कई सारे स्पेस मिशन किए हैं और कई क्रू मेंबर को स्पेस में भेजा है ।

साथ में एलन मस्क का यह भी कहना है कि इंसानों की तादाद पृथ्वी पर आज इतनी बढ़ गई है कि उन्हें जीने के लिए सोर्सेस कम पड़ रहे हैं । हर साल कोई ना कोई देश में युद्ध जरूर होता है और इससे मानव जाति पर खतरे बने रहते हैं ।

साथ में एस्ट्रॉयड गिरने के या इससे दुनिया खत्म होने के भी असर आए दिन होते रहते हैं । इसलिए वह नई पृथ्वी का निर्माण करना चाहते हैं जो कि मार्स के रूप में हमें देखने को मिल सकती है ।

# रॉकेट के प्रोपेलेंट स्टेशन बनाना

दोस्तों रॉकेट जो काम करते हैं जैसे कि सेटेलाइट को पृथ्वी की कक्षा तक ले जाना या कक्षा में स्तिथ करना इसके लिए उस रॉकेट को बूस्ट करने की जरूरत होते ही । यानी कि पृथ्वी से ऊपर उठाने की जरूरत पड़ती है ।

इसके लिए जो इंधन लगता है वह liquid oxygen, liquid hydrogen, Nitrogen tetroxideI, Kerosene जैसे इंधन का इस्तेमाल किया जाता है । यह इंधन रॉकेट किस तरह का है उस पर निर्भर होता है कि उसमे किस तरह का इंधन होगा । इसपर अलग एक पोस्ट द्वारा इंफॉर्मेशन लेंगे ।

प्रोपिलीन होता है और कई स्पेस मिशन इसी इंधन खत्म होने के बाद खत्म हो जाते हैं । पर एलन मस्क का यह प्लान है कि उसी रेउजेबल रॉकेट में दोबारा से इंधन भर के उन्हें दोबारा से लांच करना और ऐसे स्टेशन वह या तो पृथ्वी पर बना सकते हैं या फिर स्पेस में भी बना सकते हैं ।

पर स्पेस में थोड़ा खतरा होता है क्योंकि बाकी सेटेलाइट उनसे टकरा सकती है या फिर ज्यादा गर्मी की वजह से वह ब्लास्ट भी हो सकते हैं इसलिए अगर स्पेस में फ्यूल स्टेशन बनाने थे है तो उसे सबसे पहले ठंडे वातावरण में रखना होगा और यह वातावरण उस इंधन को गरम भी नहीं करना चाहिए और बर्फ के रूप में भी नहीं लाना चाहिए ऐसा सिस्टम इजेक्ट करना होगा ।

सबसे पहले एलन मस्क के राकेट द्वारा पर्याप्त सामग्री मार्च तक पहुंचाई जाएगी ऐसे कई सारे मिशन होंगे और जितनी सामग्री की जरूरत मार्स पर जीवन बसाने के लिए होगी । वह चीजे जो सबसे पहले मार्स तक पहुंचाई जाएगी । उसके बाद धीरे-धीरे लोगों को पहुंचाया जाएगा ।

पर लोगों को मार्स पर पहुंचाने से पहले जरूरी लोग जैसे इंजीनियर, क्रू मेंबर को वहां तक पहुंचाया जाएगा । जो कि वहां का सेटअप करेंगे यानी कि ग्लास की बिल्डिंग और बाकी चीजें बनाना जैसे काम इंजीनियर द्वारा किए जाएंगे ।

फिर मंगल ग्रह के वातावरण में बदलाव करने की कोशिश की जाएगी यानी कि मंगल ग्रह को गर्म करने की प्रोसेस शुरू की जाएगी क्योंकि मंगल ग्रह का तापमान -60 डिग्री तक होता है और इस तापमान में इंसान जिंदा तो रहेंगे पर उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा ।

इसलिए वहां का तापमान बढ़ाना जरूरी है और यह काम वहा पर न्यूक्लियर हमलों से करने की बात हो रही है । साथ में मंगल ग्रह के उपग्रह में भी बर्फ पाई जाती है उस पर भी कुछ परीक्षण होंगे ।

# स्पेस मिशन के लिए मेरी राय

दोस्तों एलन मस्क या उनकी टीम जितना मैं तो ज्यादा आईडिया नहीं लगा सकता हूं । पर सबका दिमाग अलग-अलग सोचता है इसलिए मेरा कहना यह है कि रॉकेट को एक एयर बैलून द्वारा ऊपर उठाया जाए और एक सीमित ऊंचाई तक जाने के बाद फिर बूस्टर को शुरू कर दिया जाए तो कई सारा इंधन बच जाएगा ।

इंधन बचने के साथ-साथ पृथ्वी के सरफेस पर होने वाले ब्लास्टिंग भी रोके जा सकते हैं । एक बार पूरा रॉकेट एक सीमित ऊंचाई तक पहुंच जाए तो रॉकेट को शुरू करके वह एयर बैलून पृथ्वी तक वापस आ सकता है या फिर उस पूरे एयर बलून को रॉकेट के अंदर समा कर लेने का प्रोसेस शुरू होना चाहिए ।

इससे वातावरण से आने वाली हवा रॉकेट को अन्य दिशा में नहीं धकेल पाएगी और रॉकेट सही डायरेक्शन में आगे बढ़ेगा । पर यह प्रोसेस कुछ ही मिली सेकंड में होना जरूरी । क्योंकि एक बार रॉकेट शुरू हो गया तो वह और बलून रॉकेट से टकरा सकता है या मिशन दुर्घटना का शिकार हो सकता है या फिर रॉकेट को दूसरी तरफ ले जा सकता है । यह मेरी राय थी आपकी राय भी मुझे कमेंट में लेना पसंद आएगा ।

दोस्तों इस पोस्ट में हमने जाना कि ” स्पेस एक्स क्या है? स्पेस एक्स कैसे काम करती है? स्पेस एक्स कंपनी फ्यूचर स्पेस रिसर्च के लिए क्या करेगी? पुराने स्पेस मिशन में क्या कमियां?

तो दोस्तों यह आर्टिकल कैसा लगा COMMENT जरूर करें । अगर इस आर्टिकल से जुड़ा आपका कोई सवाल है तो कृपया कमेंट बॉक्स में जरूर पूछे । ताकि आपके साथ और भी लोगों की परेशानी दूर हो । अगर आर्टिकल अच्छा लगे तो इसे अपनों में और आपके पसंदीदा सोशल मीडिया वेबसाइट पर SHARE जरूर करें । अन्य सोशल मीडिया साइट पर हमारे नोटिफिकेशन पाने के लिए कृपया हमें आपके पसंदीदा सोशल मीडिया साइट पर फॉलो भी करें ।

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