नमस्कार दोस्तों मेरा नाम है ओंकार और मेरी वेबसाइट OKTHGALAXY.COM पर आपका फिर से एक बार स्वागत है। दोस्तो आज के पोस्ट का टाइटल देखकर आपको पता चल गया होगा कि हम आप Best companies business strategy पर जानकारी लेंगे।

जी हां दोस्तों आज हम एक ऐसे आईडिया के बारे में जानकारी लेंगे जो आपके बिजनेस में काफी बढ़ोतरी ला सकता है। या बिजनेस बड़ा करने में मदद कर सकता है। वैसे दोस्तों में कोई बिजनेसमैन तो चलाने वाला व्यक्ति नहीं हूं, पर यह स्ट्रेटजी मुझे अलग-अलग बिजनेस कंपनियों से और एप्लीकेशन द्वारा मिली है।

तो उसी का सहारा लेते हुए में मेरे कुछ आईडिया और बिजनेस स्ट्रेटजी आपको यहां पर बताने जा रहा हूं क्योंकि कई सारे लोग बिजनेस स्टार्ट तो करते है। पर बिजनेस में कमाई ज्यादा ना होने की वजह से काफी कम समय में बिजनेस बंद कर देते है। तो ऐसा ना करें और मैंने पहले ही बता दिया है।

यह मेरे कुछ आईडिया और ट्रिक्स है। जो मैं आपको यहां बताऊंगा। मैं कोई बिजनेस करने वाला व्यक्ति नहीं हूं । मैं एक यूट्यूबर ब्लॉगर, राइटर, एडिटर और मोटिवेशनल वीडियो बनाने वाला व्यक्ति हूं। दोस्तों चलिए आज के इस पोस्ट में आपको बिजनेस बढ़ाने के लिए क्या कुछ नया इंटरेस्टिंग और यूज़फुल जाने को मिलेगा। इसके बारे में सबसे पहले पॉइंट बता देता हूं।

◆ एप्पल की बिजनेस स्ट्रेटजी

◆ फेसबुक की बिजनेस स्ट्रेटजी

◆ गूगल की बिजनेस स्ट्रेटजी

◆ मार्वल की बिजनेस स्ट्रेटजी

◆ अपना बिज़नेस कैसे बढ़ाये?

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बिज़नेस बढ़ाने के तरीके? Understand best company’s business strategy for doing business.
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एप्पल की बिजनेस स्ट्रेटजी

दोस्तों एप्पल कंपनी को कौन नहीं जानता है। आज दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनी एप्पल ही है। जिसमें एप्पल के मोबाइल फोन, आईपैड, आईपैड से लेकर कंप्यूटर, टीवी और वॉच तक शामिल है। आज एप्पल ने टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री पर आधे से ज्यादा अधिक कब्जा कर लिया है।

वैसे एप्पल का फर्स्ट फोन और आज के प्रोडक्ट में काफी अंतर है। क्योंकि एप्पल अपने हर एक डिवाइस या फिर प्रोडक्ट के लिए काफी रिसर्च करता है। और मैंने एक बात तो काफी समझ ली थी कि एप्पल के सीईओ Tim Cook जो है, वह अपने हर एक प्रोडक्ट के लिए काफी रिसर्च अपने टीम से करवाते है।

साथ में जब तक उन्हें वह प्रोडक्ट सही ना लगे तब तक उसे मार्केट में नहीं उतारते है। इसके लिए वह अपने टीम से पूरी तरह से काम करवा लेते है। या फिर काम पूरा होने के बाद ही टीम को काम से एग्जिट मिल जाती है। ऐसे में एप्पल की यही स्ट्रेटजी है। कि जब तक उस प्रोडक्ट से सेटिस्फेक्शन ना मिले तब तक उस प्रोडक्ट पर रिसर्च जारी रहेगी।

एप्पल कंपनी का एक आइडिया काफी मजेदार है और वह आइडिया हर एक बिजनेसमैन को फिर चाहे वह किसी भी प्रकार का बिजनेस में फॉलो करना चाहिए। जब भी एप्पल का प्रोडक्ट लॉन्च होता है। तो उसमें कुछ कमियां निकाली जाती है या फिर रखी जाती है।

यह इसलिए ताकि अगला प्रोडक्ट लॉन्च कर दिया जाए और वही प्रोडक्ट फोन के लिए इस्तेमाल हो जाए तो क्या होगा? जैसे कि आपने देखा होगा पहले ब्लेड आते थे जो अलग-अलग शेप में होते थे और यह इसलिए होते थे ताकि ब्लड के साथ-साथ उसका रेझर भी सेम कंपनी का होता था ताकि खरीदने वाला दूसरी कंपनी का blade भी ना खरीदे या फिर उससे जुड़े इंस्ट्रूमेंट ही ना खरीदें।

इसके लिए ही ऐसे आइडिया लगाई जाती थी। सेम आइडिया एप्पल आज लगा रहा है, यानी कि ऐपल के प्रोडक्ट पर एप्पल के ही टूल्स इस्तेमाल होने चाहिए। अब अगर आपने एप्पल के फोन को देखा होगा या फिर किसी डिवाइस को देखा होगा तो आपको समझ में आ जाएगा कि एप्पल फोन में हेडफोन जैक का स्लॉट ही नहीं होता है।

इसके लिए आपको अलग प्रोडक्ट खरीद कर उसमें हेडफोन और चार्जर कनेक्ट करना होता है। है ना कमाल का आईडिया? एक प्रोडक्ट बेचने पर दूसरा खरीदना ही पड़ेगा ऐसे ही आईडिया बिजनेस के लिए इस्तेमाल किए जा सकते है।

फेसबुक की बिजनेस स्ट्रेटजी

 दोस्तों अगर बात करें फेसबुक की तो, फेसबुक में आज व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम, मैसेंजर, मैसेंजर लाइट पेज मैनेजर जैसे एप्लीकेशन आते है। हालांकि यह सारे एप्लीकेशन का ओनर एक ही है। और वह है मार्क जुकरबर्ग। अब यहां पर हमें मार्क जुकरबर्ग जी की ज्यादा इंफॉर्मेशन तो नहीं लेनी है। पर मैं आपको इस एप्लीकेशन के कुछ आईडिया के बारे में बताऊंगा।

दोस्तो मार्क जुकरबर्ग द्वारा सबसे पहले फेसबुक ही अपलोड किया गया था या फिर शुरू किया गया था। और तब एप्लीकेशन भी नहीं था, हम सिर्फ मोबाइल फोन पर ही वेबसाइट ओपन करके फेसबुक को इस्तेमाल करते थे। उसके बाद फेसबुक एप्लीकेशन 4 फेब्रुवारी 2004 को लांच किया गया और वह भी एक साधारण बिटा वर्जन था। उसके बाद फेसबुक मैसेंजर को 2011 में लांच किया गया।

अब आप दोनों में से एक एप्लीकेशन को इस्तेमाल करते हो तो दूसरा एप्लीकेशन इस्तेमाल ही करना पड़ता है। जैसे कि फेसबुक से किसी को मैसेज भेजना हो तो फेसबुक मैसेंजर या मैसेंजर लाइट होना जरूरी ही है। या फिर फेसबुक मैसेंजर पर साइन इन करना हो तो फेसबुक अकाउंट तो जरूरी ही है।

तो यह भी काफी इंटरेस्टिंग बात है कि, एक एप्लीकेशन इस्तेमाल करने के लिए दूसरा होना ही जरूरी है। तो यह भी एक बिजनेस का काफी अच्छा ट्रिक या आईडिया है। एक एप्लीकेशन को इस्तेमाल करने के लिए दूसरा या फिर तीसरा एप्लीकेशन भी जरूरी होगा।

ऐसे में अभी हाल ही में फेसबुक द्वारा यह डिसाइड किया गया था कि फेसबुक, व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम का डाटा एक दूसरे से लिंक किया जाएगा। पर यह प्लान व्हाट्सएप के यूजर कम होने की आशंका होने की वजह से या फिर लोगों द्वारा इस प्लान को लेकर नर्वस होने के वजह से यह फैसला नहीं दिया गया।

व्हाट्सएप वैसे तो एंड टो एंड इंक्रिप्शन के लिए ही लोग इस्तेमाल करते है। पर काफी सारे चैट वायरल होते है। तो क्या व्हाट्सएप को एंड टो एंड इंक्रिप्शन मैसेंजर एप कहा जाएगा या नहीं? मेरे हिसाब से नहीं, अब मैं ऐसा क्यों कह रहा हूं इसके लिए हमारा अगला एक पोस्ट आप जरूर पढ़े जिसका लिंक नीचे दिया गया है।

>> व्हाट्सएप एप्लीकेशन एंड टो एंड इंक्रिप्शन पर काम करता है या नहीं?

गूगल की बिजनेस स्ट्रेटजी

 दोस्तों एक बड़ी कंपनी का होना काफी अच्छा होता है। एक बिजनेसमैन के लिए क्योंकि बड़ी कंपनी का मतलब होता है पैसे का भी लेनदेन बड़ा होना या फिर नेटवर्थ की बात करें तो वह लाखों डॉलर में होना। अब बड़ी कंपनी होना एक फायदे का है । कंपनी जो चाहे वह प्रोडक्ट तैयार करके बेच सकती है या फिर मार्केटिंग कर सकती है और ऐसे में गूगल भी पीछे नहीं है।

गूगल के एप्लीकेशन या सर्विसेस की बात करें तो आम इंसान या साधारण इंसान गूगल का सिर्फ 1% ही इस्तेमाल करता है। जिसमें गूगल, जीमेल, क्रोम ब्राउजर, गूगल डॅाक्स जैसे एप्लीकेशन या सर्विस ऐसी आती है। पर गूगल के 150 से ज्यादा प्रोडक्ट और एप्लीकेशन इंटरनेट पर मौजूद है। हम आने वाले पोस्ट में उनका भी इंफॉर्मेशन काफी विस्तार से लेंगे, जिसमें उसके हिडेन ट्रिक्स भी शामिल होंगे।

तो दोस्तों गूगल के प्रोडक्ट इस्तेमाल करने के लिए आपके पास गूगल का ही अकाउंट होना जरूरी है। जिसे आप जीमेल में इस्तेमाल कर सकते हो या फिर गूगल डॉक्स, गूगल शीट या अन्य एप्लीकेशन में इस्तेमाल कर सकते हो। पर आपके पास गूगल का ही अकाउंट होना जरूरी है। ऐसे में लोग एक ही एप्लीकेशन को इस्तेमाल नहीं करते है।

कुछ लोग गूगल के एक से ज्यादा आईडी बनाते है। या फिर अलग-अलग एप्लीकेशन अलग-अलग काम के लिए इस्तेमाल करते है। जैसे कि एक बिजनेसमैन अपने बिजनेस प्लान के लिए या फिर प्रोजेक्ट या प्रेजेंटेशन के लिए गूगल शीट, गूगल बिजनेस, गूगल होम, गूगल गो या गूगल मैप का सहारा लेते है।

ऐसे में उन्हें उस एप्लीकेशन को एक्सेस करने के लिए या इस्तेमाल करने के लिए गूगल अकाउंट की तो जरूरत पड़ती ही है। तो अगर गूगल के पास अभी देखा जाए तो कम से कम 4.39 बिलियन एक्टिव यूजर्स मौजूद है।

यानी कि जितने यूजर उतना पैसा यही स्ट्रेटजी गूगल इस्तेमाल करता है। क्योंकि गूगल का 90% कमाई एडवरटाइजिंग से होता है। यह तो आपको पता ही होगा। आज कल मोबाइल पर आने वाले हर एक ऐड में गूगल का ही हाथ होता है। या फिर कहे वह गूगल द्वारा ही आते है।

जिसमें एप्लीकेशन डाउनलोड करने के बाद प्ले स्टोर और या एडवर्ब द्वारा एप्लीकेशन ऑनर को दिए हुए ऐड हो या फिर मोबाइल कंपनी को दिए हुए गूगल के ऐड हो या यूट्यूब पर आने वाले ऐड हो, हर ऐड में गूगल का ही हिस्सा होता है। या फिर गूगल द्वारा ही दिए जाते है। अब गूगल ने पहले से यह प्लान नहीं बनाया था।

जब गूगल पॉपुलर हुआ और लोगों को पसंद आने लगा तब गूगल का काफी विस्तार हो गया और गूगल ने हर हफ्ते एक कंपनी को खरीदा। ऐसे में प्ले स्टोर या फिर अन्य चीजें भी उन्होंने खरीदी हुई है। और इसका पूरा आईडिया गूगल डेवलपर का था। अब गूगल के पास कई सारे अकाउंट है।

और वह जिस एप्लीकेशन को चाहे उस एप्लीकेशन को ऐड से भर सकता है। हालांकि गूगल कीप, जीमेल, प्ले स्टोर जैसे कई एप्लीकेशन पर आपको एडवर्टाइज नहीं देखने को मिलती है। पर गूगल जब चाहे तब उन पर एड रन कर सकता है। और उससे भी अलग पैसा कमा सकता है।

तो दोस्तों अब आपको गूगल की बिजनेस स्ट्रेटजी पता चल गई होगी। अगर फिर भी मन में कंफ्यूजन है तो मैं बता दूं, गूगल ने सबसे पहले एक सोर्स बनाया जिस पर लोग पूरा भरोसा रखे।

वह सोर्स इस्तेमाल करने के लिए सर्च इंजिन, उसके बाद गूगल ने काफी सारे यूजर इकट्ठा किए ताकि उस प्लेटफार्म पर लोगों की कमी ना हो यानी कि पब्लिक भी इकट्ठा की, उसके बाद गूगल ने कुछ इंपॉर्टेंट एप्लीकेशन पर ऐड रन करवाया जिसका यूजर को भी कोई दिक्कत नहीं था क्योंकि यूजर जब चाहे तब वह ऐड बंद करवा सकता है।

पर इससे गूगल को कोई नुकसान भी नहीं होता है। यानी कि आपको बिजनेस बढ़ाने के लिए सबसे पहले एक सोर्स चाहिए। उसके बाद लोगों की टीम यानी कि यूजर होने चाहिए और उसके बाद आपके प्रोडक्ट सेल करने के लिए प्रोडक्ट होनी चाहिए। यहां पर गूगल का मेन प्रोडक्ट गूगल अकाउंट और उन अकाउंट पर शो होने वाली ऐड ही है।

दोस्तों हम जैसे ब्लॉगर गूगल के लिए एक एम्पलाई का काम करते है। यानी कि गूगल हमने किए हुए काम के बदले ऐड देता है। और उस ऐड द्वारा पैसे कमाने का मौका ब्लॉगर को दे देता है। यानी कि कोई भी एक वेबसाइट गूगल पर हो वह वेबसाइट गूगल के लिए एक एंप्लॉय का काम करती है। गूगल में काम करने वाले एम्पलाई और ब्लॉगर इन दोनों में फर्क है।

ब्लॉगर खुद की वेबसाइट को बनाते है। या फिर वेबसाइट पर काम करते है और गूगल में काम करने वाले लोग गूगल का सर्वर डाटाबेस और बाकी चीजों को संभालते है। या फिर यूट्यूबर की बात करें तो यूट्यूबर भी गूगल के एम्पलाई ही है। जो खुद के काम को यूट्यूब पर पब्लिश करते है और गूगल द्वारा पैसा कमाते है।

मार्वल की बिजनेस स्ट्रेटजी

दोस्तों MCU यानी मार्वल सिनेमैटिक यूनिवर्स क्या है? इसके बारे में हमने पूरे 1 आर्टिकल द्वारा काफी जानकारी ली है। अगर आप भी मार्वल के फैन हो तो वह आर्टिकल भी अधिक जानकारी के लिए पढ़ सकते हो।

तो मार्वल एक सुपर हीरो फिक्शन फिल्में बनाने वाली अमेरिकी कंपनी है । यह टेलीविजन स्टूडियो की सहायक कंपनी है। वह यह है कि वॉल्ट डिज्नी स्टूडियो कंपनी द्वारा मार्वल स्टूडियो को खरीदा गया है

मार्वल कॉमिक्स प्रकाशनों में दिखाई देने वाले पात्रों के आधार पर मार्वल सिनेमैटिक यूनिवर्स  फिल्मों के निर्माण के लिए जाना जाता है। यानी कि जो कॉमिक्स बने है। उन पर फिल्में बनाना और वह प्रकाशित करना जैसे काम मार्वल स्टूडियो करता है। मार्वल के बारे में हमने पिछले पोस्ट में अधिक जाना है। तो यहां पर मैं इस बारे में ज्यादा कुछ नहीं बताऊंगा।

आज हम मार्वल की बिजनेस स्ट्रेटजी या फिर आइडिया को ही देखेंगे। मार्वल की स्थापना December 7, 1993 को हुई और मार्वल की पहली फिल्म 2008 को आई जो कि आयन मैन थी। उसके बाद मार्वल ने कुल मिलाकर 23 फिल्म को बनाया और अभी भी यह फिल्में बनाती है।

पर अगर इस फिल्मों के बजट की बात करें तो बजट के हिसाब से फिल्में काफी अधिक कमाई करती है। और यह इसलिए क्योंकि मार्वल का जो फिल्में बनाने का कांसेप्ट है वह सबसे अलग और ऊंचे दर्जे का है। अगर आपने मार्वल की एंडगेम फिल्म देखी होगी तो आपको यह पता चल जाएगा कि 21 फिल्म में तो Avengers : END GAME तक आने के लिए ही मार्वल ने बनाई थी।

यानी कि 21 फिल्मों की एक ही स्टोरीलाइन थी। अब यहां पर मार्वल सबसे पहले फिल्मों में कुछ हिडन बातें रखता है। जो कि यूजर को अगले फिल्म में बताई जाती है। है ना एक एक कमाल की बात? अगर सभी चीजें खुलकर एक ही फिल्मों में दिखाई गई तो इससे अगले फिल्म का कलेक्शन डाउन हो सकता है।

या फिर वह अगले फिल्म पैसा कमाने के मामले में पीछे रह सकती है। इसलिए मार्वल पहले फिल्म का आधार लास्ट की फिल्म में भी ले सकता है। और यह पहले से शूट करके रखता है। या फिर सारा सेठ ही ग्रीन स्क्रीन से बनाता है। ताकि एडिटिंग में कोई गलतियां ना हो।

अब हमने हिंदी फिल्मों में देखा कि बाहुबली जैसी फिल्म के दो पार्ट आई थी। जिसमें पहले पार्ट में बाहुबली फिल्म ने भी दर्शकों के लिए एक ही सवाल पीछे छोड़ दिया था कि ‘कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा’ और उसी सवाल को जांचने के लिए दर्शकों को दूसरी फिल्म देखनी ही पड़ी। तो अब बॉलीवुड में भी ऐसे काम होने लगा है, जो हॉलीवुड में होते है।

अब यहां पर बिजनेस स्ट्रेटजी की बात करें तो, ज्यादातर कैरेक्टर को खरीदना है और मार्वल ने Spider-man कैरेक्टर खरीदा है। जिसका कुछ समय के लिए पूरा अधिकार डिज्नी के पास है। स्पाइडर मैन कैरक्टर अभी भी सोनी कंपनी का ही है।

और वह कुछ सीमित समय के लिए डिज्नी के लिए इस्तेमाल करने के लिए दिया है। मार्वल कंपनी जो है उसे Disney ने खरीदा है। इसलिए मार्वल स्पाइडर मैन कैरेक्टर को अपने फिल्मों में इस्तेमाल कर सकता है। दोस्तों सुपर हीरोज पर गेम भी अपलोड होती है और spider-man गेम का अधिकार सोनी के पास है।

और उस पर बने टॉयज का अधिकार डिज्नी के पास है। वैसे तो डिज्नी सोनी और मार्वल स्टूडियो में कई सारे समझौते हुए है। कई बार इनको कागजी कार्रवाई के अलावा कोर्ट की कार्रवाई का भी सामना करना पड़ता है।

तो दोस्तों यहां पर आपको समझ में आ गया होगा कि मार्वल जो है वह किस तरह से अपना बिजनेस संभालता है या फिर बढ़ाता रहता है। जैसे कि फिल्म के बजट और उसके कमाई के अनुसार कैरेक्टर बेचकर या खरीद कर या फिर उन कैरेक्टर पर टॉयज बनाकर भी काफी अच्छी कमाई कर पाता है।

मार्वल कि ज्यादा से ज्यादा कमाई फिल्म से ही हो जाती है। और अगर आज ही की बात करें तो मार्वल की अवेंजर एंडगेम सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बन चुकी है। जो स्टोरीलाइन अब तक मार्वल की थी वह सारी स्टोरी अवेंजर एंडगेम तक पहुंच चुकी है। और आगे भी शुरू है।

मार्वल्स की एवेंजर्स एंडगेम ने अब 2,508 करोड़ डॉलर (1 खरब 76 अरब 23 करोड़ 82 लाख 57 हजार 291 रुपये) की कमाई की है। यह कमाई का वर्डवर्ल्ड आंकड़ा है। पर यह कब संभव हुआ जब सारे फिल्मों के स्टोरीलाइन को एक फिल्म की तरफ ले कर गए तब। वहीं पर अगर बात करें अवेंजर्स में से आयन मैन फिल्म की तो, $585 million डॉलर के साथ यह कमाई 2008 की आठवीं सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बन चुकी।

अपना बिजनेस किस तरह से बढ़ाए?

 # मार्केट को समझो और अगली स्ट्रेटजी बनाओ

अब आपने कुछ मुख्य और बड़ी कंपनियों का किस तरह से कमाई का आईडिया होता है या फिर ट्रिक होते है, इसके बारे में जानकारी ली। तो मेरा बिजनेस बढ़ाने में सिर्फ यही कहना है कि अपने प्रोडक्ट खुद बनाओ या फिर किसी अन्य कंपनी से बनवाओ पर आपके ग्राहक को आपके प्रोडक्ट के अलावा किसी दूसरे का प्रोडक्ट ना खरीदने देना यही सबसे बड़ी बिजनेस स्ट्रेटजी होती है।

पर कुछ देश की सरकार इसके लिए मान्यता नही देते है। क्योंकी कोई अन्य कंपनी जो सेम उसी तरह का प्रोडक्ट बनाती है। वह इसके खिलाफ कोर्ट तक जाती है। पर अगर सरकार यह चाहे कि सभी कंपनियों को कमाने का अधिकार है तो वह ऐसे कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई या करती है।

ताकि सरकार को ऐसा लगता है। कि सभी कंपनियों को कमाने का अधिकार है। ऐसे में मैंने ऊपर बताया हुआ ब्लेड का उदाहरण आपने पढ़ा हो तो कुछ देश में भी ऐसा ही मामला कई सालों पहले आया था।

कंपनियां अलग-अलग शेप में ब्लड बनाती थी और उसके लिए इस्तेमाल किए जाने वाले टूल्स भी खुद के होते थे इससे एक कंपनी दूसरी कंपनियों का प्रोडक्ट नहीं इस्तेमाल कर पाते थे और इसी को रोकने के लिए सरकार ने यह नियम बनाया कि ब्लैड एक शेप में सभी कंपनियां बनाएगी।

# पोर्टेबल टूल और प्रोडक्ट बनाए

पर दोस्तो आज की जो टेक्नोलॉजी है उसके साथ चीजों को कई सारे कस्टमाइजेशन दिए जाते है। जिससे एक चीज दूसरे प्रोडक्ट पर इस्तेमाल की जा सकती है। ऐसे में पहले चार्जर के स्लॉट अलग अलग रहते थे। आगे जाकर ऐसे लग अलग चार्जर स्लॉट की वजह से लोग परेशान हो गये थे। क्योंकि हर कंपनी के स्लॉट अलग अलग होते थे।

पर अब कंपनियां सेम पोर्ट के चार्जर को इस्तेमाल में ला रही है। या सेम चार्जिंग स्लॉट device बाजार में आ रहे है। अगर कोई कंपनी अलग प्रोडक्ट बनाती है। जो कस्टमाइजेबल ना हो तो इससे कंपनियों को फायदा भी हो सकता है और नुकसान भी हो सकता है।

जैसे कि अगर प्रोडक्ट लोगों को पसंद ना आए तो लोग उस प्रोडक्ट को इस्तेमाल नहीं करेंगे साथ-साथ उस प्रोडक्ट से रिलेटेड और कई सारे टूल्स को भी नुकसान हो सकता है।

ग्राहकों को समझो, प्रोडक्ट का रिव्यु करे

 बिजनेस बढ़ाने के लिए अपने ग्राहकों को समझना भी जरूरी है। इसलिए कई सारी कंपनी या खुद अपने प्रोडक्ट का रिव्यू करती है। जैसे की RealMe हो या फिर Xiomi कंपनी हो या क़ार कंपनी हो वह यूट्यूब पर अपना खुद ही रिव्यू करती है और कमेंट के अनुसार प्रॉडक्ट बनाते है। तो यूजर को आपका प्रॉडक्ट बेचने से पहिले उसके लिए क्या जरुरी है। यह देखना सबसे पहले समझ में आता है।

उसके बाद वह प्राईसिंग और लॉन्चिंग पर ध्यान देना चाहिये। इसके साथ साथ बाकी कंपनी पर भी रीसर्च जारी रखनी चाहिए। की दूसरी कंपनी क्या लाने वाली है। और उसके हिसाब से अपना अगला प्रॉडक्ट लॉंच करना चाहिये। लोगो के साथ हमेशा अच्छे संबंध रखने चाहिये और पब्लिक का ऑपिनियन लेना चाहिये।

अगर इंडिया जैसे देश की बात करे तो यहा देवी-देवता को मानने वाले लोग भी बहोत है। जिसने कई सारे धर्म और जाती आती है। इसमें अगर इंडिया मे प्रॉडक्ट बेचना है तो आपको सामाजिक या सांस्कृतिक चीजो पर भाषण करने से पहले सोच लेना जरुरी है।

क्योंकि इंडिया में बातें काफी तेजी से वायरल होती है। और अगर बात जाति और धर्म की हो तो, प्रोडक्ट बायकॉट होने के पूरे चांसेस रहते है। में कोई प्रॉडक्ट भी नही बेचता हू पर मेरा काम है कि अपने आसपास के बिजनेस को ऑब्जर्व करू और उसके हिसाब से आपको जानकारी दु । तो इस पोस्ट में मैंने वही किया है।

दोस्तों इस पोस्ट में हमने जाना कि ” व्यापार करने के लिए सबसे अच्छी कंपनी की व्यापार रणनीति समझे . पांच अलग-अलग कंपनियां व्यापार के लिए बहुत अलग विचार रखती हैं.

तो दोस्तों यह आर्टिकल कैसा लगा COMMENT जरूर करें । अगर इस आर्टिकल से जुड़ा आपका कोई सवाल है तो कृपया कमेंट बॉक्स में जरूर पूछे । ताकि आपके साथ और भी लोगों की परेशानी दूर हो । अगर आर्टिकल अच्छा लगे तो इसे अपनों में और आपके पसंदीदा सोशल मीडिया वेबसाइट पर SHARE जरूर करें । अन्य सोशल मीडिया साइट पर हमारे नोटिफिकेशन पाने के लिए कृपया हमें आपके पसंदीदा सोशल मीडिया साइट पर फॉलो भी करें ।

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मुजे ऊंचाइयों पर देखकर हैरान है बहुत लोग,पर किसी ने मेरे पैरो के छाले नहीं देखे । OKTECHGALAXY.COM / Motivation

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