आज की Technology से Karna Kavach कैसे बना सकते है?

5
(1)

नमस्कार दोस्तों मेरा नाम है ओंकार और मेरी वेबसाइट OKTECHGALAXY पर आपका स्वागत है। दोस्तों हम जब टेक्नोलॉजी को देखते है तो कई सारे पुराने रीति रिवाज और उनमें छुपे रहस्य को टेक्नोलॉजी द्वारा खोजने की या पूरा करने की कोशिश करते है। ऐसे में श्री राम जी का धनुष बान हो या फिर राम सेतु बनाने में इस्तेमाल किए जाने वाले बड़े-बड़े पत्थर हो या फिर रामसेतु क्यों ना हो? ऐसे कई सारे तथ्य हम देखते है।

जिन्हें टेक्नोलॉजी द्वारा खोजा जा रहा होता है या फिर वह चीजें किस तरह से पूरी कि, वो भी बिना किसी टेक्नोलॉजी के। इसपर रिसर्च किया जाता है। ऐसे में हम ऐसे कई सारे रहस्य को आप तक बताने की कोशिश करते है। और मेरा मानना यह है कि पौराणिक रहस्य ढूंढने से अच्छा है कि उन्हें टेक्नोलॉजी द्वारा पूरा किया जाए ऐसे में आपने कर्ण का कवच भी देखा होगा। जो किसी भी शस्त्र को टक्कर देने की क्षमता रखता था।

जी हां दोस्तों आपने कई सारे सीरियल में ही वह देखा होगा और वैज्ञानिक आज भी कर्ण के कवच को ढूंढने की कोशिश कर रहे है। यह पूरा मामला महाभारत से जुड़ा है। ऐसा माना जाता है कि कर्ण का कवच और कुंडल अगर कर्ण ने पहना हो तो, किसी भी शस्त्र या आघात से उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता था।

इसके पीछे एक कहानी भी है जो हम नीचे विस्तार से जानेंगे और जानेंगे कि आज तक वह कवच और कुंडल क्यों नहीं मिला है। और उसे आज की टेक्नोलॉजी द्वारा किस तरह से रिप्लेस किया गया है। तो दोस्तों सभी पॉइंट में नीचे बता देता हूं जो पॉइंट यह है कि

इस पोस्ट से आप नया, इंटरेस्टिंग और यूजफुल जानोगे की कर्ण कौन थे? कर्ण का कवच क्या है? कर्ण का कवच अब बन सकता है? कर्ण के कवच के लिए आज की टेक्नोलॉजी

Karna, Suryaputra karna, Shurveer karna kaun the, Karna  kaun the, Who is Mahaveer karana, karna kavach kuya hai, What is karna kavach, Details about karana shield, How to making karna kavach, Todays karna kavach technology, Making karna kavach with todays technology,
Trending and Useful contents
> Android studio के useful Tools
> Closed PC tabs reopen कैसे करें?
> Parker Solar probe क्या है?
> एलियन होते है या नहीं?
> Website Footer Credit कैसे बदले?

कर्ण कौन थे?

दोस्तों कर्ण महाभारत के सबसे बड़े और प्रमुख पात्र में से एक थे। यह 108 भाई बहनों में से सबसे बड़े और निडर योद्धा थे। कुंती उनकी मां थी और महाराज पांडु सर्वश्रेष्ठ कर्ण के पिता थे। स्वयं परशुराम द्वारा उन्हें सर्वश्रेष्ठ योद्धा से नवाजा गया था। कर्ण जो थे वह सर्वश्रेष्ठ दानवीर कहलाते थे ।

क्योंकि उनके पास किसी ने कुछ मांगा और उन्होंने ना दिया हो ऐसा कभी नहीं हुआ जैसे की उनके पास उनके सबसे शक्तिशाली शस्त्र थे वह भी उन्होंने दान कर दिए थे। जिनकी बदौलत वह लंबी आयु तक जीने वाले थे या फिर लड़ाई करने वाले थे। इसकी कहानी भी काफी दिलचस्प है। इस कहानी का भी जिक्र हमारे पोस्ट में होने वाला है। अब आते हैं मैन मुद्दे की ओर।

कर्ण को दानवीर, सर्वश्रेष्ठ दानी, सूर्यपुत्र, दानवीर कर्ण, विजयधारी, मृत्युंजय कर्ण, जैसे अलग अलग नाम से भी जाना जाता है। कर्ण का जन्म हस्तिनापुर में हुआ था । कुंती को पहले से पता था कि उन्हें संतान प्राप्ति नहीं होगी यह उन्हें अपने दिव्य दृष्टि से पता चला था।

उन्हें सूर्यदेव एक वरदान था की किसी भी देवता का स्मरण करते रहने से उन्हें पुत्र प्राप्त होगा। उन्होंने सूर्यदेव का स्मरण किया जिससे सूर्यदेव प्रकट हुए और नाभि को छूकर उनकी नाभी तक पहुंच गए और उसी से सूर्यपुत्र कर्ण का जन्म हुआ। ऐसी मान्यता है कि उनके साथ जो कवच और कुंडल होते है वह जन्म से ही उनके पास थे।

कर्ण बचपन से ही शिक्षा में काफी निपुण थे तो उन्होंने गुरु परशुराम से अपनी शिक्षा पूरी करने की सोच ली पर हो सिर्फ ब्राह्मणों को हि शिक्षा देते थे। ऐसे में कर्ण ने झूठ बोल कर अपनी शिक्षा शुरू की, की वह ब्राह्मण है। और यहीं से उनकी शिक्षा की शुरुआत हुई। गुरु परशुराम से उन्होंने युद्ध कला और धनुर्विद्या की शिक्षा दी।

कर्ण जो थे वह किसी को कुछ भी मांगने पर दे देते थे इसीलिए उनकी सबसे सर्वश्रेष्ठ दानवीर में गिनती होती थी। पर अच्छाई में भी अगर कोई बुराई ढूंढने लगे तो इससे उस अच्छे इंसान की अस्तित्व की लड़ाई ही खत्म हो जाती है। ऐसे ही कुछ कर्ण के साथ हुआ था।

कर्ण का कवच क्या है?

दोस्तों कर्ण का कवच जो था वह कवच उनके जन्म से उनके साथ उनके पीठ पर था। इस कवच के साथ उन्हें परास्त करना यानी कि हराना लगभग नामुनकिन था। इसमें इतनी शक्ति और ताकत थी कि कोई भी भाला तलवार उस पर काम नहीं करती थी। यहां तक की कोई रथ भी अगर उसके कवच से गुजरता था या पार होता था तो भी वह कर्ण का कवच थोड़ा भी मुड़ता या टूटता नहीं था।

कवच के साथ कर्ण का मुकाबला करना मतलब शत्रु की हार ही होती थी। अगर यह कवच उनके पास हो तो कोई कोई भी शत्रु जीत हासिल नहीं करता था। ऐसे में कवच को निकालने के लिए काफी छल कपट करना पड़ा जैसे कि दानवीर होने की आदत ही उनके हार की वजह बनी।

कर्ण के कवच कुंडल के लिए छल कपट

अगर कर्ण का कवच उनके साथ हो तो उन्हें पराजित करना मुश्किल था। इसी वजह से अर्जुन पिता देवराज इंद्र ने एक छल करने का प्रयास किया। उन्होंने अर्जुन का कवच और कुंडल निकालने की योजना बनाई और इसके मुताबिक उन्होंने जब कर्ण सूर्य देव की पूजा कर रहा होता है।

तब भिक्षु का रूप धारण करके कर्ण से कवच और कुंडल मांग लिए और कर्ण ने वह अपनी आदत के अनुसार दे दिए। उसके बाद युद्ध में उनकी देहांत हो गया और उनकी अच्छी आदत उनके लिए घातक साबित हुई। फिर भी उन्होंने अपने वचन से पीछे हटने का नहीं सोचा यही होती है एक सच्चे योद्धा की पहचान।

कर्ण कवच आज के टेक्नोलॉजी से बन सकता है या नहीं?

तो दोस्तों कर्ण जैसा कवच बनाने की कई सारे सालों से रिसर्च होती आ रही है। जो कि सेना के लिए हो या फिर किसी कार या रूम के लिए सिक्योरिटी देने हो। हम बुलेट प्रूफ चीजों का इस्तेमाल करते है। जो कि बुलेट को किसी चीज से पार नहीं होने देती। तो कर्ण का कवच आज बनाना भी काफी आसान है।

पर वह किस मेटल से बना था वह जानकारी किसी को नही है। अब उस समय में जो मेटल इस्तेमाल होते थे वह आज उपलब्ध है या नहीं वह भी पता नहीं है। पर कर्ण का कवच बन सकता है और इसके लिए अलग-अलग आईडिया इन्वेंटर द्वारा लगाए जाते है। जिसमें बुलेट प्रूफ जैकेट, बुलेट प्रूफ ग्लास या फिर बुलेट प्रूफ कार ही क्यों ना हो ऐसे कई सारे इन्वेंशन आज भी होते है।

तो इन इन्वेंशन में और कर्ण के कवच में उतना ज्यादा फर्क नहीं है। क्योंकि कर्ण का कवच और यह के इन्वेंशन भी सेम ही काम करते है। कि दुश्मन के वेपन से आए हुए बोले झेलना या नाकाम करना। कौनसे वो इन्वेंशन है जो अब तक बने है या फिर बन सकते है। इन पर अब हम नजर डालते है। और देखते है कि कर्ण के कवच जैसी आज की टेक्नोलॉजी क्या है।

कर्ण कवच के लिए आज की टेक्नोलॉजी

बुलेट प्रूफ जैकेट

आज के पोस्ट का मुख्य टॉपिक्स यही है कि कर्ण जैसा कवच बन सकता है या नहीं? तो दोस्तों इस पर भी कई सारे सालों से रिसर्च चल रही है। और कर्ण जैसा कवच तो हम नहीं बना सके। पर हमारे पास फिलहाल ऐसे ऐसे जैकेट है जो उनके कवच जैसा ही काम करते है। जिसमें बुलेट प्रूफ जैकेट की बात करें तो वह भी कर्ण के कवच की तरह ही काम करता है।

जो दुश्मन की गन यानी बंदूक की गोलियों को जवानों को लगने से रोकता है। उस समय में जो कवच थे वह ज्यादातर लोहे से बनाए जाते थे। तो उनमें कई सारे धातु का मिक्स करके इस्तेमाल किए जाते थे। जिसमें सोना, चांदी से लेकर पोलाद तक का इस्तेमाल होता था। पर आज के जो बुलेट प्रूफ जैकेट बनाए जाते है।

वह भी उसी तकनीक से बनाए जाते है यानी कि धातु को मिक्स करके यूज कर देना। इससे एक धातु में कई सारे बदलाव होकर वह धातु मजबूत बन जाती है और वजन में भी हल्की होती है। जैसे कि सबसे कम वजनी धातु की बात करें तो एलुमिनियम सबसे कम वजन की धातु पर काफी यूज़फुल मेटल है।

साथ में उसमें अगर अलग धातु मिल जाए तो कम वजन के साथ-साथ वह काफी मजबूत भी बन जाती है। और इसीलिए हवाई जहाज जैसे जेट या अन्य चीजों में एलुमिनियम का ज्यादा इस्तेमाल होता है।

बुलेट प्रूफ ग्लासेस

किसी दूसरी चीज की बात करें जो कर्म के जैसे काम करती है। तो वह है बुलेट प्रूफ ग्लासेस। जो पारदर्शी तो होती है पर उससे कई ज्यादा दबाव या आघात सह सकते है। जब भी बुलेट प्रूफ ग्लासेस बनाए जाते है। तब उसमें ग्लास के अलावा प्लास्टिक कोटिंग और बीच-बीच में धातु का इस्तेमाल किया जाता है। यह कोटिंग इतनी छोटी होती है कि कांच के आरपार भी हम देख सकते है।

और कांच में मजबूती भी आ जाती उसमे यूज किए गए मेटल से। ऐसे कई सारे कोटिंग को एक करके उसमें मजबूती लाई जाती है। यह बुलेट प्रूफ ग्लासेस मजबूती के साथ-साथ क्रैक भी नहीं जाते। कई सारी कंपनियां यह दावा करती है कि उनके बुलेट प्रूफ ग्लासेस मजबूत है कि उन्हें कोई भी नहीं तोड़ सकता और इसके लिए वह कई सारे जगह पर प्रतियोगिता भी रखते है।

मकड़ी का वेब 

तो आपने कभी घर में स्पाइडर यानी कि मकड़ी कीड़ा तो देखा ही होगा। यह ऐसा होता है कि आपके घर को खराब कर देता है। पर इसकी एक अच्छी बात आपको पता ना हो तो मैं आपको बता दूं यह अपने शिकार को फसाने के लिए खुद ही एक ऐसा ट्रैप बनाते है। जिससे इसमें कीड़े फस जाते है और निकल नहीं पाते। पर हम मकड़ी के बारे में नहीं जानना।

हमें मकड़ी जो वह दौर छोड़ते है उसके बारे में जानना है। जैसे कि यह दौर काफी मजबूत होती है। आप इन्हें तोड़ सकते हो पर छोटे-छोटे कीड़े नहीं तोड़ सकते। पर बात करें इन्ह डोर की तो, छोटे-छोटे वेब सिल्क अगर साथ में जोड़कर 1mm बनाई जाए तो, इनमें कई किलो तक वजन उठाने की ताकत होती है।

और कोई भी आघात झेल सकते है। एक डोरी की तरह बनता और तनता है। और अगर यह एक शिल्ड की तरह काम करता है। तो कोई भी बुलेट इसके आर पार नहीं जा सकती। स्पाइडर वेब सिल्क थोड़े चिपचिपे जरूर होती है। पर इन्हें सही मैटेरियल के साथ इस्तेमाल किया जाए तो बात ही कुछ और होगी।

सिलिकॉन कार्बन की लेयर

दोस्तों हीरे में कार्बन पाया जाता है। सिलिकॉन कार्बन एक सबसे मजबूत मैटेरियल है। तो अगर दोनों का एक समिश्र देखे तो उसके सिलिकॉन कार्बन भी एक से मजबूत चीज या पदार्थ में गिना जाता है। सिलिकॉन कार्बन स्पेस यात्रा में भी इस्तेमाल किया जाएगा। और यहां तक की एक लिफ्ट बनाने की भी प्लान हो रहा है।

जो कि फ्यूचर प्लान हो सकता है। और यह स्पेस लिफ्ट इसे Carbon Nanotube लेयर से बनेगी जो कि काफी मजबूत होगी। जो एक लिफ्ट को दूसरे स्पेस ऑब्जेक्ट जैसे कि इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन तक ले जाएगी है। है ना काफी मजेदार बात। अगर इसी को आर्मी के लिए कवच में इस्तेमाल किया जाए तो यह नजारा ही कुछ अलग ही होगा।

ग्रेफेन की शील्ड

दोस्तों ग्रेफेन जो होता है वह दुनिया की सबसे हार्ड मटेरियल में माना जाता है। सबसे हार्ड होने के साथ-साथ काफी छोटी और पतली प्लेयर से भी इसके हार्डनेस पता चलती है। ग्रेफेन डायमंड से कई गुना हार्ड माना जाता है। और स्टील से लगभग 200 गुना मजबूत माना जाता है।

इसके मजबूती का अंदाजा आप इसके प्रेशर झेलने के यूनिट से लगा सकते हो। यह ग्रेफेन एक नेट या वेब की तरह काम करता है? ग्रेफेन का इस्तेमाल ज्यादातर बायोमेडिकल, इलेक्ट्रॉनिक चीजों में, सेंसर और हवाई जहाज में किया जाता है। साथ में अगर ग्रेफेन की बात करें इसकी पेपर से भी छोटी लेयर भी काफी मजबूत होती है।

और जैसे मैंने कहा स्टील से लगभग 200 गुना मजबूती इस पेपर जितनी ग्रेफेन लेयर में होती है। पर जैसे कि इसमें मजबूती तो है तो ऐसे ग्रेफेन लेयर में कार्बन और बाकी चीजें इस्तेमाल करके भी एक काफी अच्छी और मजबूत शील्ड बनाई जा सकती है।

टंगस्टन कि शील्ड

टंगस्टन हीरे जितना ही मजबूत होता है। बल्कि कई ज्यादा। पर टंगस्टन कोई कार्बन मटेरियल नहीं है। यह एक मेटल है। जिसका इस्तेमाल इस्तेमाल बल्ब के तार बनाने में भी हुआ था। पर यह सबसे जादा मेल्टिंग प्वाइंट तक जा सकता है  इसका मेल्टिंग प्वाइंट 3422 सेल्सियस है। टंगस्टन सबसे ज्यादा हिट तो झेल सकता है।

पर इसका जो डैमेज होने का लेवल है। वह काफी वीक है। यह हिट तो झेलता है पर कम ताकत के साथ भी काफी वीक बन जाता है। यह मेटल अर्थ पर पाई जाने वाली धातु में काफी कम ही है। इसका अर्थ पर मिलना मतलब काफी बड़ी बात होती है। 1 ग्राम टंगस्टन को खोजने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ती है। इसी वजह से भी इसे शील्ड में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।

लोहे का कवच

लोहा जो होता है वो बुलेट को तो रोक सकता है। पर इस्तेमाल करना काफी मुश्किल होता है। क्योंकि लोहा वजन में उतना हल्का नहीं होता जितना 1 Shield को होना चाहिए जैसे कि अगर बात करें एक लोहे के शिल्ड की तो उसे कम से कम 5 से 7 किलो वजनी तो होना ही चाहिए और उसकी मोटाई आधे से आधा इंच की होनी चाहिए।

पर इतना सारा लोहा अगर शिल्ड बनाने के लिए इस्तेमाल होता है। तो इससे वह स्पीड काफी वजनदार बनेगी। जिसे इस्तेमाल करना काफी मुश्किल होगा अगर बात करें चांदी और सोने की शील्ड तो इस बात को भूल जाओ। एक तो यह मेटल सबसे पहले तो काफी महंगे होते है। और ऐसे में धातु की शील्ड तो कोई इस्तेमाल नहीं करेगा।

डायमंड से शील्ड बनाना

डायमंड यानी हीरा भी सबसे मजबूत चीज में से एक माना जाता है। इसकी मजबूती का अंदाजा आप कभी नहीं लगा सकते। किसी भी चीज, हथौड़े का मार तो हीरा काफी आसानी से कह सकता है। यहां तक कि अगर किसी मेटल पर वह हीरा रखा जाए और उसे मारा जाए तो सबसे पहले वह मेटल कट जाएगा या फिर क्रैक हो जाएगा।

पर डायमंड इतना मजबूत होने के बावजूद भी इसका इस्तेमाल शील्ड में नहीं किया जा सकता क्योंकि हीरा एक सबसे महंगी चीज में से एक है। और एक शिल्ड को बनाने में ऐसे कई सौ दो सौ डायमंड लगेंगे जो कि अच्छी बात नहीं है। साथ में डायमंड शील्ड भी कहीं चोरी हो जाएगा या गायब हो जाए तो वह नुकसान अलग से उठाना पड़ेगा। पर आप सोच कर देखिए की डायमंड की शील्ड कैसे एक बुलेट करो रोक सकती है।

दोस्तो इस पोस्ट में हमने जाना कि “ कर्ण कौन थे? कर्ण का कवच क्या है? कर्ण का कवच अब बन सकता है? कर्ण के कवच के लिए आज की टेक्नोलॉजी

तो दोस्तों यह आर्टिकल कैसा लगा COMMENT जरूर करें । अगर इस आर्टिकल से जुड़ा आपका कोई सवाल है तो कृपया कमेंट बॉक्स में जरूर पूछें । ताकि आपके साथ और भी लोगों की परेशानी दूर हो । अगर आर्टिकल अच्छा लगे तो इसे अपनों में और आपके पसंदीदा सोशल मीडिया वेबसाइट पर SHARE जरूर करें । अन्य सोशल मीडिया साइट पर हमारे नोटिफिकेशन पाने के लिए कृपया हमें आपके पसंदीदा सोशल मीडिया साइट पर फॉलो भी करें ।

ताकि हमारा आने वाला कोई भी आर्टिकल आप मिस ना कर सको । हमें Facebook , Instagram , Linkedin ,  Twitter और Telegram पर फॉलो करें । साथ में हमारी आनेवाली पोस्ट के ईमेल द्वारा Instant Notification के लिए FeedBurner को SUBSCRIBE करें ।    


कितना भी पकडलो फिसलता ज़रूर है, ये वक्त है जनाब बदलता ज़रूर है OKTECHGALAXY.COM / Motivation

Thank You, Thank You logo, Ty logo, Thank you very much,

How useful was this post?

Click on a star to rate it!

Average rating 5 / 5. Vote count: 1

No votes so far! Be the first to rate this post.

As you found this post useful...

Follow us on social media!

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *