Indian Buildings में कांच ज्यादा यूज क्यों नहीं होती?

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नमस्कार दोस्तों मेरा नाम है ओंकार । मेरी वेबसाइट OKTECHGALAXY.COM पर आपका स्वागत है । दोस्तो इंडिया एक प्रगतिशील देश है और यहाँ पर कई कंट्रक्शन बन रहे है। ऐसे में बिल्डिंग भी कंट्रक्शन का सबसे बड़ा एक भाग है, इनके बिना कंट्रक्शन संभव नहीं होता होता है। और इसी वजह से हमने दुनिया की पांच सबसे ऊंची और बड़ी बिल्डिंग भी देखी है।

जिसमें हमें देखा कि सभी देशों में ज्यादातर चीन और जापान की बिल्डिंग ही दुनिया में ऊंची बिल्डिंग है। इसलिए मैं यहां पर आपको यह बता रहा हूं कि इंडिया में ऐसी बडी बिल्डिंग क्यों नहीं बन रही है। और इसके साथ-साथ यह भी बताऊंगा कि इंडिया में Glass कि बिल्डिंग क्यों नहीं बन सकती है या बनती नहीं है।

अब इन दो पॉइंट पर ही सारा आर्टिकल मौजूद है। तो इंडिया में ऊंची और कांच की बिल्डिंग के ना बनने का कारण क्या है। आर्टिकल में आपको नया इंटरेस्टिंग और यूज़फुल जानने को मिलेगा कि इंडिया में कितनी बड़ी बिल्डिंग के मौजूद है? इंडिया में ज्यादा बडी बिल्डिंग क्यों नहीं बनती? इंडिया में ज्यादा काच यूज़ करके बिल्डिंग क्यों नहीं बनती?

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इंडिया में कितनी बड़ी बिल्डिंग के मौजूद है?

दोस्तों ऐसा नहीं है कि इंडिया में ऊंची बिल्डिंग मौजूद नहीं है। कई सारे बिल्डिंग ऐसी है। जो इंडिया का नाम सबसे ऊंची बिल्डिंग की लिस्ट में लाती है। पर अगर देखा जाए तो यह तुलना हम इंडिया के कुछ स्टेट के लिए कर सकते है।

क्योंकि दूसरे देशों की तुलना में इंडिया में ऊंची बिल्डिंग काफ़ी कम है। और देखा जाए तो सातवां अजूबा माना जाने वाला ताजमहल भी ऊंची बिल्डिंग के लिस्ट में नहीं आता है। ताजमहल एक लोकप्रिय वास्तु है पर ऊंची बिल्डिंग नहीं है। ऊंची बिल्डिंग के लिए बिल्डिंग को समंदर तल से या जमीन से जितना हो सकता है उतना ऊपर उठाना या बनाना जरूरी है।

उसके हिसाब से उस बिल्डिंग को ऊंची बिल्डिंग के लिस्ट में गिना जाता है। ऐसे में मुकेश अंबानी का घर या बंगला भी ऊंची बिल्डिंग लिस्ट में आता है। पर इस बंगले को हम दुनिया बड़ी बिल्डिंग के साथ कंपेयर नहीं कर सकते। यह बिल्डिंग इंडिया के लिए ही सीमित होगा ।

साथ में कई सारे बिजनेस मैन, Entreupreneur, नेता और youtuber की काफी सारी बड़ी से बड़ी बिल्डिंग इण्डिया में मौजूद है। निचे दी गयी लिस्ट से आप इंडिया की बड़ी बिल्डिंग की ऊंचाई जान सकते हो ।

Rank
1
NameHeightLifts/elevators
FloorsYear
1Palais Royale320 metres (1,050 ft)12882018
2World One280.2 metres (919 ft)1876 above ground
2 below ground
2020
3Lodha Trump Tower268 metres (879 ft)Info N/A782020
4Omkar 1973 (Tower A/B)267 metres (876 ft) Info N/A 732021
5261.6 m / 858 ft262.6 m / 858 ft

इंडिया में ज्यादा बडी बिल्डिंग क्यों नहीं बनती?

दोस्तों बाकी देश जहा पर बड़ी बिल्डिंग की लिस्ट में से आगे जाना चाहते है। वहां पर इंडिया ऐसा कोई प्लान नहीं बना रहा है, जैसी की इंडिया को ऊंची बिल्डिंग बनानी चाहिए । ऊंची बिल्डिंग बनाने के लिए काफी सारे दिक्कतों का सामना करना पड़ता है यही वजह इंडिया को ऊंची बिल्डिंग बनाने से रोकता है। और यही कुछ कारण आज हम इस पोस्ट से जानने वाले है। तो सबसे बड़ा कारण इंडिया ऊंची बिल्डिंग क्यों नहीं बनाता तो मैं आपको बता दूं.

ऊंची बिल्डिंग काफी खर्च ली होती है।

दोस्तो जहां पर इंडिया की बात करें तो इंडिया में बड़ी और ऊंची बिल्डिंग बनाना इतना मुश्किल भी नहीं है। पर इस काम के लिए दौलतमंद और पैसे वाले लोग सामने आ सकते है। अब यहां पर एक तरफ इंडिया गरीबी और भूखमरी का सामना कर रहा है और दूसरी तरफ आमिर लोग ऊंची बिल्डिंग बनाने की सोच रहे है। ऐसे मैं उस बिल्डिंग पर पूरी तरह से उस बिल्डिंग के मालिका हक रहता है।

इस वजह से ही बड़ी बिल्डिंग बनाना मुश्किल हो जाता है। अब हमारे इंडिया के कई सारे लोग ऐसे है जो सबसे ज्यादा नेट वर्थ में सबसे ऊपर तो है पर उन्हें ऊंची बिल्डिंग बनाने का कोई इंटरेस्ट नहीं है। क्योंकि जो भी बिजनेसमैन लोग नेट वर्थ में सबसे ऊपर की लिस्ट में रहते है। उनके बिजनेस और आईडिया कुछ अलग होते है और इसी का जवाब यह है कि ऊंची बिल्डिंग की रेस में इंडिया आगे नहीं रहता है।

पावर सप्लाई की कमी

दोस्तो बिल्डिंग जितनी ऊँची और बड़ी बनेगी उसे लगने वाली पावर सप्लाई भी सबसे ज्यादा लगेगी और कुछ 10 साल ही हो गए है। जब हम लोड शेडिंग से उभर रहे है और अभी हाल ही में कोयला खत्म होने की बातें भी चल रही है। ऐसे मैं ज्यादा बड़ी बिल्डिंग बनाने से उसे ज्यादा पावर सप्लाई भी देनी होगी और जहां तक बात हे जनरेटर या फिर बड़े सोर्सेज की तो उसके लिए भी पेट्रोल, डिझेल या कोयला काफी लगता है।

इसी वजह से पावर सप्लाई की कमी भी बड़ी बिल्डिंग में हो सकती है और जहां पर पूरे के पूरे गांव अंधेरे में चले जाते है। वहां पर तो बडी बिल्डिंग को पावर सप्लाई देना मुश्किल हो जाता है और इसी कारण के चलते इंडिया में ज्यादा बड़ी बिल्डिंग नहीं बन रही है।

क्योंकि पहले से लोग सोचते है कि सरकार सिर्फ गरीबों के लिए विरोधी है और अमीरों के लिए साथ देने वाली है। तो इससे ओ मुद्दा और भी बड़ा और अलग रास्ते पर चला जाता है। इसीलिए ज्यादा बड़ी बिल्डिंग इंडिया में नहीं बन रही है।

गरीबों के लिए कोई स्कीम नहीं

दोस्तो गरीब लोग जहां पर इंडिया की बात करें 80 परसेंट से ज्यादा ही है। और इसी के चलते गरीबो के लिए बड़ी बिल्डिंग का कोई मूल्य ही नहीं होता है। गरीब लोग जहां पर एक वक्त का खाना मिल जाए इतना ही सोचते है उन्हें इन बिल्डिंग से कोई मतलब नहीं होता है।

ऐसी बड़ी बैठेंगे सिर्फ अमीर लोग खरीद सकते है और खरीदी बिक्री करके पैसा कमा सकते है। इसी वजह से पैसों की लेन-देन आमिर लोग में ही होगी और गरीब इस बिल्डिंग से दूर रहेगा । इसलिए भी इंडिया में बड़ी बिल्डिंग बन नहीं रही है।

पुरानी रीति रिवाज

दोस्तो एक तरफ दुनिया में बड़ी से बड़ी हाईटेक बिल्डिंग बन रही है। और दूसरी तरफ इंडिया में कुछ ऐसी भी जगह है जहां पर रहने के लिए घर नहीं है। इसके साथ-साथ इंडिया में जहां पर शहरी इलाके है वहां पर बिल्डिंग की तादाद काफी ज्यादा है।

पर गांव या नगर परिसर में इतना डेवलपमेंट नहीं देखा जाता क्योंकि लोगों के पास पैसों की कमी और जगह की कमी दोनों ही है। साथ में पुराने रीति रिवाज के लोग अपनी जमीन डेवलपमेंट के लिए नहीं देते । गांव के लोग खेती करके ही गुजारा करना पसंद करते है।

उसका असर डेवलपमेंट पर होता है। पर यह अच्छी बात है कि खेती के लिए जमीन रख देना और डेवलपमेंट के लिए ना देना । इससे सभी जगह शहरीकरण नहीं होगा और कुछ तो हिस्से खेती लायक बचेंगे ।

जगह की कमी और ज्यादा कीमत

दोस्तो इंडिया एक डेवलप देश है और हर एक सेकंड में नया कंट्रक्शन यहां पर बन रहा है। पर जितनी ज्यादा ऊंची बिल्डिंग बनाए जाएगी उतना ही उसका सरफेस चौड़ा बनता जाएगा और यही कंट्रक्शन का नियम होता है। क्योंकि बिल्डिंग ऊपर से नीचे जमीन पर ज्यादा भार देने का काम करती है।

यानी की बिल्डिंग को जितना ऊपर उठाया जाएगा वह उतना ही लोड जमीन या सरफेस तक ला देगी । इसके लिए सबसे पहले ज्यादा जगह एक बिल्डिंग के लिए काम में लानी पड़ती है। और इसलिए ज्यादा बड़ी बिल्डिंग बनाने के लिए ज्यादा जमीन लगेगी जो मिल पाना काफी मुश्किल है। तो यहां पर बिल्डिंग बनाने वाले व्यक्ति को जमीन के साथ-साथ पैसा, कंट्रक्शन, इंजीनियरिंग और गुडस यानी सामान तैयार करना पड़ेगा ।

खेती लायक और उपजाऊ जमीन की वजह से

दोस्तों इंडिया एक कृषि प्रधान देश है और इसी के चलते जो जमीन खेती लायक हे उन्हें भी कंट्रक्शन में लाया जाए तो इससे काफी तबाही होगी और उपजाऊ जमीन बर्बाद हो जाएगी । जो किसान पहले से अपनी जमीन पर निर्भर है वह कंट्रक्शन के लिए कभी भी अपनी जमीन नहीं देते है। और इसी कारण से ज़मीन खरीदना भी काफी मुश्किल होता है। इसी का जवाब यह है कि इंडिया में काफी बड़ी से बड़ी हाईटेक नहीं बन पाती है।

इंडिय बिल्डिंग में ज्यादा काच यूज़ क्यों नहीं होते?

दोस्तों कांच एक पारदर्शक चीज है और यह कई रोशनी को रिफ्लेक्ट करने का काम भी करती है। इसका फायदा यह होता है कि आप जितनी चाहे उतनी रोशनी अपने बिल्डिंग के अंदर पहुंचा सकते हो और ऊर्जा, रौशनी और बिजली को घटा सकते हो। पर इसके दुष्परिणाम यह है कि इसकी वजह से कई जगह पर आग लग सकती है। पेड़-पौधे और जंगल तक जल सकते है।

दोस्तों इंडिया में आप जहां पर देखोगे वहां पर लोग और मानवीय वस्ती मौजूद है। और काफी कम ऐसी जगह है जो कि खाली है। अगर किसी शहर में ऐसी बड़ी बिल्डिंग बनाई जाएगी तो उस कांच से रिफ्लेक्ट होने वाली सारी सूरज की किरणें आसपास के घर बिल्डिंग को जाला सकते है।

ऐसे कई मुद्दे सामने आए है जो यहां बताते है कि अगर सूरज की किरने एक जगह परावर्तित हो जाए या कलेक्ट हो तो वह कार, बस और घर तक जला सकते है। और इसी के चलते इंडिया में कांच कि बिल्डिंग के नहीं बनती है।

दोस्तों ऐसा नहीं है कि इंडिया में कांच की बिल्डिंग बनती नहीं है। यह काम इंडिया में भी होता है पर एक बिल्डिंग के लिए जरुरत से ज्यादा कांच इस्तमाल नहीं किए जाते यानी कि इंडिया में पूरी की पूरी बिल्डिंग को कांच से लपेटा नहीं जाता है। जैसे आप बुर्ज खलीफा को देखते हो या अन्य कुछ इमारतों को देखते हो तो उसमें काफी कांच यूज़ किया हुआ देखने को मिलता है।

पर इंडिया ऐसे करना ही नहीं चाहता। क्योंकि बुर्ज खलीफा में इस्तमाल किया हुआ कांच अलग ही कांच है। जो सूरज की किरणों के सूरज ओर ही रिफ्लेक्ट करता है या अपने अंदर ऑब्जर्व करता है। इससे वो किरणे बिल्डिंग के अंदर दाखिल नहीं होने देती। ऐसी कांच काफी महंगी होती है और उस पैसो से पूरा एक बंगलो या फ्लैट बन सकता है और इसी वजह से यह कांच महंगी होने की वजह से ही बिल्डिंग में कांच इस्तेमाल करना काफी खर्चीला माना जाता है।

नेचर का ख्याल

दोस्तों आप यह तो जानते हो कि इंडिया में नेचर यानी पर्यावरण बचाने के लिए अलग-अलग मुहिम तैयार होती है। और वह नैसर्गिक सोर्स बचाने के लिए काम करती है। तो बिल्डिंग बनाते वक्त अगर नेचर का ख्याल नहीं रखा जाता तो उसका विरोध होता है।

अब आपने कई बार यह सुना होगा कि ओजोन लेयर अलग-अलग कानो से खत्म हो रही है। ऐसे में उस बिल्डिंग पर लगाए हुए कांच सूरज की सारी किरने अलग-अलग दिशा में रिफ्लेक्ट करेंगे या परावर्तित करेंगे तो इससे हमारे नेचर को भी खतरा होगा और इसी वजह से ही इंडिया में काफी ऊँची और बड़ी बिल्डिंग नहीं बनती है।

कांच फोड़ने का प्रयास

दोस्तो यह कारण आपको काफी मजाक वाला या कॉमेडी लगेगा पर यह बात सही है। और मेरे ख्याल से पूरी तरह से सही है। क्योंकि अगर थोड़ा बहुत भी कारण किसी को झगड़ा करने का, आंदोलन करने का मिल जाए तो लोग पूरी जान लगा देते है। किसी आंदोलन में अगर ऐसे आंदोलन या किसी अन्य कारण की वजह से उस बड़ी सी बिल्डिंग को टारगेट किया जाए जहां पर आंदोलन या अन्य गतिविधियां हो रही है।

वहां पर वह बिल्डिंग आ जाती है। तो उस बिल्डिंग के कांच फोड़ने का काम कुछ लोग कर सकते है। या फिर जानबूझकर भी उसको बिल्डिंग को जलाया जा सकता है। इसी वजह से भी इंडिया में कांच बिल्डिंग में इस्तमाल करना सही नहीं माना जाता ।

दोस्तो इस पोस्ट में हमने जाना कि इंडिया में कितनी बड़ी बिल्डिंग के मौजूद है? इंडिया में ज्यादा बडी बिल्डिंग क्यों नहीं बनती? इंडिया में ज्यादा काच यूज़ करके बिल्डिंग क्यों नहीं बनती

तो दोस्तों यह आर्टिकल कैसा लगा COMMENT जरूर करें । अगर इस आर्टिकल से जुड़ा आपका कोई सवाल है तो कृपया कमेंट बॉक्स में जरूर पूछें । ताकि आपके साथ और भी लोगों की परेशानी दूर हो । अगर आर्टिकल अच्छा लगे तो इसे अपनों में और आपके पसंदीदा सोशल मीडिया वेबसाइट पर SHARE जरूर करें । अन्य सोशल मीडिया साइट पर हमारे नोटिफिकेशन पाने के लिए कृपया हमें आपके पसंदीदा सोशल मीडिया साइट पर फॉलो भी करें ।

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“माफ़” तो बार-बार कर सकते है मगर भरोसा बार-बार नहीं कर सकते है। OKTECHGALAXY.COM / Motivation

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